7(सात) प्रमुख कारण! क्यों विश्व युद्ध की संभावना अधिक है?

जैसा कि हम जानते हैं कि दुनिया एक गहरे संकट से गुजर रही है और देश के अधिकांश लोग अस्तित्व के लिए संघर्ष कर रहे हैं और जहां एक ओर बहुत से देश कोरोना काल में अपनी डूबती अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए जूझ रहे हैं वहीं दूसरी ओर चीन सुपर पॉवर बनने की तैयारियों में जुटा है और बहुत हद तक वह अपने इस प्रयोजन में सफल होता भी दिख रहा है।

ऐसे में, निम्नलिखित मुख्य बिंदुओं के आधार पर विश्व युद्ध की संभावनाओं की परिकल्पना की जा सकती है और विश्व युद्ध होने के संकेतों का आंकलन निम्नलिखित तथ्यों के आधार पर किया जा सकता है –

१. तेजी से बढ़ते कोरोना संक्रमण ने सुपर पॉवर अमरीका के हौंसले पस्त किए हुए हैं। उस पर अमरीका गलतियों पर गलतियां किए जा रहा है। एक ओर चीन से उसके संबंध बिगड़ चुके हैं तो वहीं दूसरी ओर कासिम सोलेईमानी को मारने के बाद से, ईरान अमरीका को खदेड़ने की फिराक में है। बात यहीं समाप्त नहीं हो जाती, इसके अतिरिक्त अमरीका के संबंध रशिया और उत्तर कोरिया से कभी सामान्य रहे नहीं हैं।
देखा जाए तो यह कहना गलत नहीं होगा कि, दुश्मन देशों के लिए अमरीका को पछाड़ने का इससे अच्छा और उचित अवसर नहीं हो सकता जबकि अमरीका गृह हिंसा का शिकार भी बना हुआ है। अमरीका की दिनों दिन टूटती कमर और कमजोर होती अर्थव्यवस्था उसे शक्तिहीन करने पर लगी है। ऐसे में, विश्व युद्ध की संभावनाएं प्रबल जान पड़ती है।

२. रशिया की बात की जाए तो कहना गलत नहीं होगा कि यदि विश्व युद्ध हुआ तो वह सबसे बड़े खलनायक की भूमिका निभाएगा। इस समय रशिया आग में घी डालने का काम कर रहा है। उसकी चुप्पी बहुत कुछ बयान करती है।

इन सब परिस्थितियों में, रशिया उस बंदर की तरह है जो दो बिल्लियों की लड़ाई वाली कहानी में रोटी चट कर जाता है।

३. रशिया और चीन के मध्य बैठकों और बातचीत का सिलसिला जारी है। चीन अपना प्रयोजन सिद्ध करने के लिए या यूं कहें कि रशिया को अपने पक्ष में करने के लिए चीन, कोरोना महामारी से निपटने के लिए रशिया को हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।

४. समस्याओं से घिरा अमरीका कुछ इस प्रकार अपनी सुद – बुध खोता जा रहा है कि वह भी अपने नाश होता देख कुछ ऐसा न कर दे कि, जहां उसका नाश हो रहा है वहां सत्यानाश हो जाए। कहने का तात्पर्य यह है कि, अमरीका की स्थिति ऐसी है कि वह किसी भी क्षण स्वयं से नियंत्रण खो सकता है क्योंकि उसके भीतर चीन को लेकर आक्रोश की अग्नि धधक रही है।

५. ईरान और चीन के युद्ध पोतों की तैनाती इस बात का संकेत देती हैं कि, अमरीका पर अकस्मात आक्रमण के लिए यह दोनों देश पूरी तरह तैयार हैं।

६. चीन को, भारत और अमरीका के संबंध खटक रहे हैं तो उसने भारत को लपेटने के लिए भारत को सीमा विवाद में उलझा रखा है और अब तो वह नेपाल को भी भारत के विरूद्ध तैयार किए हुए है। समीकरण कुछ ऐसे संकेत देते हैं कि मानो भारत विश्व युद्ध का केंद्र सा बना हुआ है। वर्तमान स्थिति को समझा जाए तो कहना गलत नहीं होगा कि, विश्व युद्ध का आरंभ भारत से ही न हो जाए।

७. चीन के पास इस समय एक तीर से तीन शिकार करने का और सुपर पॉवर बनने का स्वर्णिम अवसर है जिसे वह खोना नहीं चाहेगा। चीन के निशाने पर इस समय अमरीका, भारत और पाकिस्तान भी है और यदि समीकरण चीन के पक्ष में रहे तो नेपाल को तो वह कभी भी अपने कब्जे में ले लेगा।
अभी तो चीन भारत, अमरीका और पाकिस्तान की चरमराती अर्थव्यवस्था को देख रहा है। जैसे ही उसे लगेगा कि इन तीनों देशों की स्थिति आंतरिक नियंत्रण से बाहर हो गई है वह आक्रमण करेगा।
चीन, फिर से किसी वायरस को फैला कर भी आक्रमण कर सकता है।

उपर्युक्त सभी कथन एक अभी तो मात्र एक अवलोकन है। देखते हैं आगे क्या होता है?

धन्यवाद।
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