लघु उद्योग व नए व्यवसायों (स्टार्टअप्स) के लिए जीएसटी व अन्य पंजीकरण संबंधी जानकारी।  जीएसटी प्रक्रिया की जटिलता में सुधार संबंधित सूचना, चुनौतियां व कारण।

प्रिय पाठकों,
नए व लघु उद्योग करने वाले व्यवसायियों को जीएसटी तथा अन्य पंजीकरण विकल्पों की जानकारी का अभाव रहता है और जब से ऑनलाईन जीएसटी की सुविधा उपलब्ध हुई है तब से कुछ व्यवसायी अपने आप ही कर संबंधी कार्य करने लगे हैं वह भी जीएसटी रिटर्न की जटिलता को जाने बगैर।

ऐसे में त्रुटियों का होना स्वाभाविक हो गया है और यहां मैं आपको बताना चाहूंगा कि जब हम रिटर्न फॉर्म 3बी भरते हैं तो उसकी ऑनलाईन प्रक्रिया में रिवाइज रिटर्न का कोई विकल्प उपलब्ध नहीं है और न ही उसे रद्द करके पुनः भरने का कोई विकल्प/प्रावधान उपलब्ध है। ऐसी बहुत – सी समस्याएं जीएसटी रिटर्न प्रक्रिया में विद्यमान है जिस पर सरकारी तंत्र को ध्यान देना चाहिए।

आईए विस्तापूर्वक जानते हैं कि व्यवसायियों के लिए जीएसटी लेना क्यों अनिवार्य हो जाता है और जीएसटी प्रक्रिया की जटिलता में सुधार संबंधित सूचना व इसके क्या कारण हैं व इनका समाधान कैसे हो।

जैसा कि हम जानते हैं कि किसी भी उद्योग को जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) भारत की कर व्यवस्था में बड़े बदलाव के साथ परिचित किया गया है। पुरानी कर व्यवस्था की जटिलता को कम करने के लिए जीएसटी को समाविष्ट किया गया। किन्तु जीएसटी भी जटिलता से परिपूर्ण है। कैसे??
आईए जानते हैं –

  1. यदि आप नया लघु उद्योग/व्यवसाय आरंभ करना चाहते हैं तो सर्वप्रथम आपको प्रोपराइटर/पार्टनरशिप आदि में अपना जीएसटी पंजीकरण करवाना होगा। जबकि सरकार यह कहती है कि २० लाख सालाना से कम आय वाले को जीएसटी की आवश्यकता नहीं है। किन्तु किसी भी फर्म या कंपनी के साथ लेन – देन करने हेतु आपको चालू खाता खुलवाना होगा जो आरबीआई के निर्देशानुसार बिना जीएसटी प्रमाण पत्र के नहीं खुलेगा।

आईए अब निम्न दिए गए उदहारण से जीएसटी जटिलता को कारण सहित जानते हैं –
उदहारण –
मान लीजिए कि आप कोई मैनपॉवर या श्रम ठेकेदार(विक्रेता) का काम शुरू करने के इच्छुक हैं और आपकी फर्म में दो से तीन कर्मचारी नियुक्त हैं। १० से कम संख्या वाले विक्रेता को अपने कर्मचारी को ईएसआई और पीएफ देने की भी आवश्यकता नहीं होती।
अब आपको किसी कंपनी से मैनपॉवर सप्लाई के ठेकेदार के तौर पर अनुबंध करना है तो ऐसी स्थिति में वह कंपनी आपसे इन्वॉयस और लेन – देन के लिए चालू खाते का विवरण मांगेगी जिसके माध्यम से वह आपको पेमेंट कर सके। अब आपको चालू खाता खुलवाने के लिए बैंक को जीएसटी पंजीकरण देना होगा। अब यदि ऐसी स्थिति में बैंक आपका खाता बिना जीएसटी पंजीकरण न लेकर श्रम पंजीकरण लेकर खोल दे तो आप जीएसटी के बिना भी अपना काम सुलभता से कर सकते हैं।

उपर्युक्त उदहारण से यह सिद्ध होता है कि आरबीआई और कर विभाग को इस प्रकार के विक्रेताओं के लिए कर संबंधी और बैंक संबंधी प्रक्रिया को सरल करना चाहिए। और जीएसटी पंजीकरण का विकल्प भी छोटे विक्रेताओं के लिए खोलने चाहिए।

  1. अब हम जीएसटी की जटिलता की बात करते हैं।
    जीएसटी में सर्वप्रथम 3बी रिटर्न भरी जाती है जो हर महीने भरनी होती है। 3बी रिटर्न की प्रक्रिया में पहले चालान जमा होता है (यानि कि आपसे कर पहले ही वसूल लिया जाता है)। अब यदि मासिक रिटर्न भरने के समय कोई त्रुटि हुई या आपसे कोई बिल (सेल – पर्चेस का) छूट गया तो उस गलती के सुधार का प्रावधान जीएसटी की प्रक्रिया में है ही नहीं।
    मुख्य बात यह है कि ऐसी त्रुटियों के सुधार का अधिकार निर्धारण अधिकारी के पास भी नहीं है क्योंकि जीएसटी भुगतान की प्रणाली पूर्णतः ऑनलाईन है।
    ऐसी स्थिति में जब आपकी रिटर्न्स का सालाना आंकलन होगा और रिटर्न के भुगतान और सेल पर्चेस की इंवॉयस में बेमेल दिखेगा तब कर विभाग आप पर ही ऊंगली उठाएगा, जो गलत है।
    और यदि आप समय से कर नहीं जमा करेंगे तो आपको विलम्ब शुल्क देना होगा।
    उपर्युक्त दोनों स्थितियों में हार आपकी ही है।
  2. आईए अब निम्न दिए गए उदहारण से जीएसटी संबंधित एक और जटिलता को जानते हैं –

उदहारण –
मान लीजिए कि आप किसी मिठाई की दुकान पर मिठाई खरीदने गए। मिठाई का भाव 400 रूपए/किलो है। अब यदि आप बिना बिल के मिठाई खरीदेंगे तो आपको एक किलो मिठाई के 400 रूपए ही दुकानदार को देने होंगे और यदि आप जीएसटी बिल की मांग करेंगे तो संबंधित कर 400 रूपए के अतिरिक्त आपको देना होगा। ऐसी स्थिति में आप क्या करेंगे?? सोचिए।

दूसरी ओर, यदि आप बिल नहीं लेते तो इस बात की संभावना बहुत अधिक है कि दुकानदार बिना बिल की सेल को दर्शाए ही नहीं। और बड़ी ही सहजता से वह दुकानदार कर (टैक्स) की चोरी कर लेगा।
यदि जीएसटी उत्पाद की राशि में सम्मिलित रहता तो ऐसी चोरी न होती और भ्रष्टाचार पर अंकुश लग सकता था।

जीएसटी संबंधी इन जटिलताओं का क्या समाधान है इसका आंकलन हम अगले लेख में आपसे साझा करेंगे।

धन्यवाद 🙏🙏🙏

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